Monday, January 16, 2012

नैया जमानै की ब्वारी तै ई-बार (रैबार) !

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चसा ह्युंद का दिना,


ठंडा मा नि रैणु , मेरी कैटरिना !


कैफ्री,टी-शर्ट की इखारी


थेक्ल्यों मा नी घूमी,


हुड वाऴु टॉप,जींस अर,


रेडवाइन पीकी झूमी !


मेरा छौंदी तू ज़रा भी


पैंसा-टकों की फिकर नी कैई ,


जू भी ज्यू करू सी खैई ,


खूब लै-पैरेक रैई !


बैंक-खाता मा तेरा,


पैसा भेजियालिन मिना,


ठंडा मा नि रैणु , मेरी कैटरीना !!


बौंण-पुंग्डियौं जब जैली,


सेलफोन,आइपैड लीकी जाई,


हिलवाऴा सैंडिल पैरीक न जाई,


ढुगीं-डळ्यौं मा ठोकर नी खाई !


गौं-गौलों नी घूमी


द्वी कंदुडियौं हेडफोन लगैकी,


बंद-भितरु सेई ना,


हीटर-ब्लोवर जगैकी !


खुदेली जब भी तू मेरी कैट,


मी दगडी करी विडिओ चैट,


खाणों ओवन पर


गरम करीक खाणु,


नहेंण का वास्ता,


गीजर चलाणु !


सदानी खुश रखणु आफु तै तिना,


ठंडा मा नि रैणु , मेरी कैटरिना  !

हिन्दी सार यह है कि जिस तरह से दुनिया नित बदलती जा रही है, हमारे पहाड़ों में वैसे तो लोग-बाग़ अब कम ही रह गए है, लेकिन विकास की दौड़ में जो नित समृद्धता और परिवर्तन आ रहे है,लोग अब अपनी बेटियों के नाम भी वो पहले जैसे बीरा, कमला इत्यादि न रखकर ऐश्वर्या, कैटरीना इत्यादि रखने लगे है , उसमे आने वाले वक्त में अगर कोई पति विदेश में है और उसकी पत्नी गाँव में है तो वह ई-मेल या फिर एस एम् एस से क्या सन्देश अपनी पत्नी/ प्रेमिका के लिए भेजता है, वह इस कविता में दर्शाने की कोशिश की गई है !

4 comments:

Patali-The-Village said...

आजकल के हालातों पर सही चित्रण|

dheerendra said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति,
welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

कुमार राधारमण said...

वैश्वीकरण के इस दौर में देखिए,कुछ भी अपना न रहा!

JHAROKHA said...

naye jamane ka navini karan to sab par asar dalega hai na------
poonam