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चसा ह्युंद का दिना,
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चसा ह्युंद का दिना,
ठंडा मा नि रैणु , मेरी कैटरिना !
कैफ्री,टी-शर्ट की इखारी
थेक्ल्यों मा नी घूमी,
हुड वाऴु टॉप,जींस अर,
रेडवाइन पीकी झूमी !
मेरा छौंदी तू ज़रा भी
पैंसा-टकों की फिकर नी कैई ,
जू भी ज्यू करू सी खैई ,
खूब लै-पैरेक रैई !
बैंक-खाता मा तेरा,
पैसा भेजियालिन मिना,
ठंडा मा नि रैणु , मेरी कैटरीना !!
बौंण-पुंग्डियौं जब जैली,
सेलफोन,आइपैड लीकी जाई,
हिलवाऴा सैंडिल पैरीक न जाई,
ढुगीं-डळ्यौं मा ठोकर नी खाई !
गौं-गौलों नी घूमी
द्वी कंदुडियौं हेडफोन लगैकी,
बंद-भितरु सेई ना,
हीटर-ब्लोवर जगैकी !
खुदेली जब भी तू मेरी कैट,
मी दगडी करी विडिओ चैट,
खाणों ओवन पर
गरम करीक खाणु,
नहेंण का वास्ता,
गीजर चलाणु !
सदानी खुश रखणु आफु तै तिना,
ठंडा मा नि रैणु , मेरी कैटरिना !
हिन्दी सार यह है कि जिस तरह से दुनिया नित बदलती जा रही है, हमारे पहाड़ों में वैसे तो लोग-बाग़ अब कम ही रह गए है, लेकिन विकास की दौड़ में जो नित समृद्धता और परिवर्तन आ रहे है,लोग अब अपनी बेटियों के नाम भी वो पहले जैसे बीरा, कमला इत्यादि न रखकर ऐश्वर्या, कैटरीना इत्यादि रखने लगे है , उसमे आने वाले वक्त में अगर कोई पति विदेश में है और उसकी पत्नी गाँव में है तो वह ई-मेल या फिर एस एम् एस से क्या सन्देश अपनी पत्नी/ प्रेमिका के लिए भेजता है, वह इस कविता में दर्शाने की कोशिश की गई है !
4 comments:
आजकल के हालातों पर सही चित्रण|
बहुत सुंदर प्रस्तुति,
welcome to new post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....
वैश्वीकरण के इस दौर में देखिए,कुछ भी अपना न रहा!
naye jamane ka navini karan to sab par asar dalega hai na------
poonam
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