Thursday, July 4, 2013

तू कैमा निबोली, त्वेकुणि म्यार सौं च।





आपणि जिकुडी मा बसायुं, इक त्य़ार नौ च,
पर तू  कैमा निबोली, त्वेकुणि  म्यार सौं च।

दिल त त्वे अपणु मिन, पैली ही दियाली छौ, 

जन्मपत्री भेजीं बाबा न, तन्त बतेरी जगौ च।

रौंत्याळा त बतेरा ह्वाला,गौं डांडी-काँठ्यो मा,
पर  सुपिनौ मा रिङ्ग्दु, सिर्फ तेरुहि  गौं  च।

जौं आँखियोंन ह्यूंद भी कभी, पाळु नी ढ़ोळी,
यादमा तेरी, वूं आँखियों मा, लग्दी सगौं च।

गौ-गौळा, बौण-पंदेरों हिटदू, लोग घूर्दी रैंदन,
पूछिनिहो जैन,त्व़े क्य ह्वाई, ईनि क्व़ा मौ च। 

2 comments:

  1. बहुत प्रेमिल गीत च यो।

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