Tuesday, May 12, 2009

गढ़वाली नोक-झोंक !

नौनी:---- सूणियाली मिन तेरी चबड़-चबड़,
….चकडैत छोरा, भिन्डी ना बोल !
नौनू:-----आहा, जुबान सी कना फूल झड़ना,
…..लबरा छोरी तू गिचु ना खोल !! ,
नौनी: ----तू भिन्डी ना बोल..!.
नौनू: -----तू गिचु ना खोल..!

नौनी:---- चबड़-चबड त इन छै कर्नु
……..जन क्वी लोदगु छै चबाणी
नौनू:----- न खोल तै लबरा गिच्चा
…….कन सडी सी बास आंणि
नौनी: ----शट-अप् तू भिन्डी ना बोल
नौनू: ….. चुपकर तू गिचु ना खोल
नौनी:---- तू भिन्डी ना बोल..!.
नौनू:---- तू गिचु ना खोल..!

नौनी: ---- तेरा जना मेरा बाट्टू मा,
……अग्नै-पिछ्नै, बिजां मजनू घुम्दन
नौनू: ----- अरे तेरा जनौ तै बट्टा मा,
…… कुकुर भी नि सुन्ग्धन
नौनी:------ शट-अप् तू भिन्डी ना बोल
नौनू: ……. चुपकर तू गिचु ना खोल
नौनी: ----- तू भिन्डी ना बोल..!.
नौनू: ------ तू गिचु ना खोल..!

नौनी:------ किलै छै तू इन रिन्गुणु ,
….. क्या चांदी तू मी मुकै ?
नौनू: ----- त्वै सी मी तै कुछ नी चैन्दु,
….. तू नाजा मी सी मुख लुकै
नौनी: -----शट-अप् तू भिन्डी ना बोल
नौनू: ----- चुपकर तू गिचु ना खोल
नौनी:---- तू भिन्डी ना बोल..!.
नौनू: ----- तू गिचु ना खोल..!

2 comments:

  1. khoob cha likhyaan bhaiji,
    mi shubhkaamna denu chaa

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  2. Sukriya dabraaji, bahut adhik vakt nee mili paandu likhan ka vaasta.

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